पालीताना में करोड़ों मुनियों, चौरासी लाख तपस्वियों तथा अनेकों तीर्थंकरों के क्षेत्र में स्थित प्रत्येक जिनालय की आराधना के लिए यह क्रम बनाया गया है। पाँच चैत्यवंदन पाँच विशेष भावनाओं या पाँच प्रकार के तीर्थंकरों के प्रति समर्पित है।
परम गुरु देव की सेवा कीजे, जनम मरण दुःख दूर करीजे।सिद्ध अच्युत सुख संपति पावे, 'वीर' कहे भव पार लगावे।
शांतिनाथ मुखचंद्र विलोकी, आनंद अमृत रस पीजे।शत्रुंजय गिरिराज उपर, जिनवर दर्शन कीजे॥ १ ॥पंचम आरे ए तीरथ केरो, महिमा कह्यो न जाय।अचलगच्छ नायक शांति जिनेश्वर, भविजन लागो पाय॥ २ ॥कोटि गमे मुनिवर एही गिरिथी, पाश तणा दुःख चूरी।सिद्धि वधूटो वर रव कीधो, कर्म तणा दल चूरी॥ ३ ॥संवेग रंगे जे नर वंदे, ते पावे भव पार।'रत्नसिद्धि' कहे शांति जिनेश्वर, तारो तारो तार॥ ४ ॥
गिरिराज की चढ़ाई शुरू करने से पहले तलहटी (जयतळायु) पर प्रथम चैत्यवंदन किया जाता है। चैत्यवंदन पाठ: palitana 5 chaityavandan in hindi full
पालिताना शत्रुंजय महातीर्थ जैन धर्म का सबसे शाश्वत और पवित्र स्थान है। यहाँ की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अंग "5 चैत्यवंदन" (Palitana 5 Chaityavandan) की विधि है। मान्यता है कि इस विधि को पूर्ण श्रद्धा से करने पर जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
3. तृतीय चैत्यवंदन: श्री रायण पगलिया चैत्यवंदन (Third Chaityavandan: Rayan Pagla)
भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी ५ करोड़ मुनियों के साथ चैत्र सुद पूर्णिमा के दिन इसी गिरिराज से मोक्ष गए थे। उन्हीं के नाम पर इसे पुंडरीक गिरि भी कहते हैं। चैत्यवंदन पाठ: Step-by-Step Chaityavandan Ritual | PDF - Scribd यह
सूरजकुंड सोहामणो, कावड़यक्ष अभिराम;नाभीराया कुल मण्डणो, जिनवर करूं प्रणाम। 3
१. प्रथम चैत्यवंदन: श्री जयतळायु चैत्यवंदन (तलहटी)
99 yatra 5 chaityavandan – The Jainsite World's Largest Jain Website. Step-by-Step Chaityavandan Ritual | PDF - Scribd नाभीराया कुल मण्डणो
यह साधकों में वैराग्य और भक्ति का भाव जगाते हैं।
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: साढबा माता (शैलपुत्री / अंबिका माता)